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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अध्‍यादेश की घोषणा को मंजूरी दी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेट (उत्‍पादन, विनिर्माण,आयात,निर्यात,परिवहन,विक्रय,वितरण,भंडारण और विज्ञापन) निषेध अध्‍यादेश, 2019 की घोषणा को अपनी मंजूरी दे दी है.
यानी अब जगह जगह खुले हुक्का बार इस तरह की गतिविधि में पाए जाने पर दंडित किये जा सकते हैं.

अध्‍यादेश की घोषणा के बाद,ई-सिगरेटों का किसी प्रकार उत्‍पादन,विनिर्माण,आयात, निर्यात, परिवहन,विक्रय(ऑनलाइन विक्रय सहित),वितरण अथवा विज्ञापन(ऑनलाइन विज्ञापन सहित) एक संज्ञेय अपराध माना जायेगा और पहली बार अपराध के मामले में एक वर्ष तक कैद अथवा एक लाख रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों;और अगले अपराध के लिए तीन वर्ष तक कैद और पांच लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेटों के भंडारण के लिए भी छह माह तक कैद अथवा 50 हजार रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं.

अध्‍यादेश लागू होने की तिथि पर,ई-सिगरेटों के मौजूदा भंडारों के मालिकों को इन भंडारों की स्‍वत:घोषणा करके,निकटवर्ती पुलिस थाने में जमा कराना होगा। पुलिस उप निरीक्षक को अध्‍यादेश के तहत कार्रवाई करने के लिए अधिकृत अधिकारी के रूप में निर्धारित किया गया है। अध्‍यादेश के प्रावधानों को लागू करने के लिए, केंद्र अथवा राज्‍य सरकार किसी अन्‍य समकक्ष अधिकारी को अधिकृत अधिकारी के रूप में निर्धारित कर सकती है.
दरसल इस विषय पर हाल में जारी एक श्‍वेत-पत्र में भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर)उपलब्‍ध वैज्ञानिक साक्ष्‍य के आधार पर ई-सिगरेटों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की है साथ ही विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भी सदस्‍य देशों से मांग की है कि इन उत्‍पादों को प्रतिबंधित करने सहित समुचित उपाय किए जाए.
ई-सिगरेटों के निषेध के निर्णय से लोगों को, विशेषकर युवाओं और बच्‍चों को ई-सिगरेटों के व्‍यसन के जोखिम से बचाने में मदद मिलेगी,पहले ही 16 राज्‍यों और एक केंद्रशासित प्रदेश ने अपने क्षेत्राधिकारों में ई-सिगरेटों को प्रतिबंधित किया है.
हिलवार्ता न्यूज डेस्क
@hillvarta.com