Breaking News

Big breaking:2023 के बाद Johnson & Johnson टेल्क पाउडर होगा बाजारों से गायब, पाउडर में कैंसर के लिए जिम्मेदार अवयव मिलने के बाद भरना पड़ा भारी जुर्माना,पूरी खबर पढिये@हिलवार्ता Good initiative : रामनगर स्थित public school ने उत्तराखंड के आजादी के नायकों की फ़ोटो गैलरी बनाकर की मिशाल कायम,खबर विस्तार से@हिलवार्ता Big Breaking: उत्तराखंड के लाल लक्ष्य सेन ने commenwealth games का स्वर्ण पदक जीत रचा इतिहास,पूरी खबर@हिलवार्ता उत्तराखंड : दुखद खबर: उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष हरीश पाठक का निधन, पूरी जानकारी @हिलवार्ता Haldwani धरना अपडेट :सिटी मजिस्ट्रेट का आश्वासन, एक हप्ते में होगा समाधान ,जलभराव से निजात के लिए चल रहा धरना स्थगित,विधायक भी पहुँचे धरनास्थल,खबर@ हिलवार्ता
ख़बर शेयर करें -

“औषधीय एवं सुंगधित पादप” नामक पुस्तक का देहरादून में विमोचन हुआ है.दून विश्वविद्यालय में तकनीकी अधिकारी डॉ हरीश चंद्र अंडोला ने मेडिसिनल, एरोमेटिक प्लांट्स इन उत्तराखंड नामक पुस्तक लिखी है.श्री हरीश अंडोला हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय से डी.फिल. हैं अंडोला ने बताया है कि वह 15 वर्ष से औषधीय एवम सुगन्ध पादपों पर शोध कार्य कर रहे हैं. पुस्तक के बारे बताते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जड़ी बूटी और एरोमेटिक पौधों की भरमार है सरकार अगर उचित दोहन और आम लोगो की भागीदारी सुनिश्चित कर सके तो इसके माध्यम से रोजगार के अवसर भी पैदा किये जा सकते हैं.
आइये पढ़ते हैं श्री अंडोला की पुस्तक के कुछ अंश
1.बुरांश (Rhododendron Arboreum) को बुरूंश भी कहा जाता है नेपाल में इसे लाली गुराँस और गुराँस के नाम से जाना जाता है। दरम्याने आकार की मोटी गाढ़ी हरी पत्तियों वाले छोटे पेड़ (Tree Rhododendron) पर सुर्ख लाल रंग के फूल खिला करते हैं। भारत के अलावा यह नेपाल, तिब्बत, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार, पकिस्तान, अफगानिस्तान, थाईलैंड और यूरोप में भी पाया जाता है। यह एरिकेसिई परिवार (Ericaceae) की 300 प्रजातियों में से है। एरिकेसिई परिवार की प्रजातियाँ उत्तरी गोलार्ध की सभी ठंडी जगहों में पाई जाती हैं। यह नेपाल का राष्ट्रीय फूल है। भारत के उत्तराखण्ड, (Uttarakhand State Tree Buransh) हिमाचल और नागालैंड राज्यों में इसे राज्य पुष्प का दर्जा दिया गया है। हिमालय में इसकी चार प्रजातियाँ मिलती हैं। दक्षिण भारत में भी इसकी एक प्रजाति रोडोडेंड्रॉन निलगिरिकम नीलगिरी की पहाड़ियों में पायी जाती है.

2.उत्तराखण्ड में बुरांश पहाड़ और पहाड़ी लोकजीवन के कई पहलुओं का पर्याय भी बना हुआ है। बुरांश का नाम आते ही पहाड़ का चित्र आँखों में तैरने लगता है। बसंत का मौसम, कई पक्षी, फूल, लोकगीत, लोककथाएँ उत्सव और त्यौहार.पर्व याद हो आते हैं। उत्तराखण्ड से संबंधित साहित्य बुरांश की चर्चा के बगैर पूर्णता प्राप्त नहीं करता।हिमालय की विविध भूस्थलाकृतिक विशेषताओं के कारण यहंा वानस्पतिक संसाधनों का विशाल एवं स्थायी भंडार चिरकाल से उपलब्ध रहा है। जहां एक ओर विभिन्न औषधीय गुणों की वजह से समूचे विश्व में आधुनिक औषधि निर्माण एवं न्यूट्रास्यूटिकल कम्पनियों मंे इन औषघीय पौधांै की माॅग दिनों दिन बढ रही है, वही लोगों तथा सरकार द्वारा इनके आर्थिक महत्व पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि इन बहुउद्ेशीय पादपों के आर्थिक महत्व पर गहनता से कार्य किया जाता है तो पहाड़ों से पलायन जैसी समस्या से काफी हद तक निजात पाया जा सकता है, वही दूसरी ओर इनके अधिक से अधिक रोपड़ से आपदा से होने वाले भूकटाव को भी रोका जा सकता है। उत्राखण्ड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाये जाने वाले इन प्राकृतिक संसाधनों में एक बहुउद्देशीय, बहुबर्षीय काष्ठीय झाड़ी और बृक्ष अमेस भी है.
डॉ अंडोला की पुस्तक में उत्तराखंड के औषधीय के साथ साथ औषधीय,एरोमेटिक सुगंधित पादपों का विशेष तरीके से वर्गीकृत किया गया है. अपने आस पास मौजूद इन पौधों का व्यवसायिक उपयोग कैसे किया जा सकता है यह भी बताया गया है.पुस्तक का बखूबी उपयोग हो सकता है बशर्ते कि जनजागरण किया जाय.डॉ अंडोला ने बताया कि पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है.
हिलवार्ता न्यूज डेस्क
@hillvarta.com