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बड़ी खबर : राज्य निर्माण के लिए संसद की बेल में जाकर नारेबाजी और विधानसभा में पर्चा फेंकने,राज्य के युवाओं को स्थानीय उद्योगों ने 70 प्रतिशत रोजगार की गारंटी के लिए संघर्ष करने वाले कभी राज्य के चिकित्सालयों की बदहाली के लिए लड़ने वाले कुमायूँ विश्वविद्यालय छात्र महासंघ के अध्यक्ष रहे राज्य आंदोलनकारी मोहन पाठक ने आज कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे का एलान किया है ।

मोहन पाठक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा है कि वह कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हैं । हिलवार्ता ने पाठक से बात करने की कोशिश की । लेकिन संपर्क नही हो पाया ।

ज्ञात रहे कि मोहन पाठक लंबे समय से बेरोजगारी सहित राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर चिंतित थे उन्होंने गत वर्ष कुमायूँ के हर जिले के पीएचसी से लेकर सीएचसी पर जाकर चिकित्सा की दुर्दशा देखी और 200 से अधिक चिकित्सालयों का जायजा लिया, स्थानीय जागरूक लोगों के साथ धरना प्रदर्शन किया । लेकिन जिस तरह से इस मुद्दे पर उन्हें पार्टी का समर्थन चाहिए था वह शायद नहीं मिला । इधर चुनावों की घोषणा के बाद भी कांग्रेस भाजपा द्वारा राज्य की बेरोजगारी और बेहाल चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस रोडमेप नहीं बनाए जाने और चुनावी मुद्दे में नजरंअंदाज किए जाने से वह छुब्ध थे । साथ ही उनके जेहन में इस बात की टीस भी कि सतारुढ़ दल धनबल के बल पर ठेकेदार टाइप लोग ही विधानसभा की चौखट तक पहुचने में कामयाब हो रहे हैं । जबकि संघर्ष करने वाले लोग हासिये पर ।

हालांकि एमबी पीजी कालेज अध्यक्ष बने मोहन पाठक कभी कांग्रेस के समर्थक थे लेकिन 2007 में मोहन पाठक ने स्व इंदिरा ह्रदयेश के खिलाफ चुनाव लड़ा और दस हजार से ज्यादा वोट हासिल किए । उन्हें युवाओं का समर्थन हासिल हुआ और समझा जाता था कि वह राज्य की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल करेंगें ।

एक बार फिर पाठक दुबारा कांग्रेस के नजदीक आए लेकिन उनका संघर्ष हमेशा उन्हें पार्टी कार्यक्रमों में आंख बंद कर शामिल होने से रोकता रहा । पाठक राज्य की माली हालत के लिए सत्तारूढ दलों को किसी न किसी मोर्चे पर विफल और आज की परिस्थिति कब लिए जिम्मेदार ठहराते रहे हैं समझा जा रहा है कि इन्ही कारणों से मोहन ने   कांग्रेस से किनारा कर लिया ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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