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Uttrakhand  मे आज से 6 दिन बाद मतदान होना है । इन 6 दिनों  में भाजपा जहां 12 फरवरी रुद्रपुर में प्रस्तावित पीएम की रैली पर निर्भर रहेगी जबकि कांग्रेस 10 फरवरी से राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे पर । अभी तक जनता पेशोपेश में हैं । निष्क्रय पड़े कार्यकर्ता मोदी और राहुल की सभाओं के बाद किस कदर सक्रिय होते है यह देखना होगा ।

राज्य के मुद्दे गायब हैं ऐसे में उम्मीदवार का आकलन कैसे हो जबकि कई सिटिंग विधायक दुबारा मैदान में है । राज्य में जागरूक लोग चाहते हैं कि गत विधानसभा में पहुचे माननीयों ने राज्य के विकास में कितना योगदान किया है वह सार्वजनिक होना चाहिए इसी तरह की बातें विधायक निधि के खर्च को लेकर भी हैं ।

सप्ताह बाद उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में 10 मार्च तक के लिए कैद हो जाएगी   मतदाताओं ने राज्य में किसके हाथ सत्ता सौपी यह भी स्पष्ट हो जाएगा । लेकिन उसे यह नहीं पता चल सकेगा कि चुनाव में जिस घोषणा पत्र और सपथ के दौरान जिस सपथ की प्रतिज्ञा माननीय करेगा उसे पांच साल में निभाएगा कि नही ? 70 सीटों पर 600 से अधिक लोग जनता के बीच हैं । हर बार की तरह फिर सरकार बनेगी और जनता के सामने कोई विकल्प नहीं होगा कि वह उसकी मनमानी पर किसी तरह का अंकुश लगा पाएगी अगर ऐसा होता तो राज्य के 70 विधायकों को मिल रही विधायक निधि 100 प्रतिशत जनता की मूलभूत समस्यों को ठीक करने में खर्च कर दी गई होती लेकिन ?

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आइये पूरी कहानी समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि राज्य में 70 विधायकों को प्रतिवर्ष कितनी धनराशि विधायक निधि के रूप में मिलती है ? हम आपको बताते हैं उत्तराखंड में हर वर्ष एक विधायक को उसकी विधान सभा मे खर्च के लिए 3.75 करोड़ रुपये मिलते हैं । 2022 चुनाव में मतदान की तिथि 14 फरवरी पास है इसलिए क्या आपको पता है कि आपके विधायक ने कितनी धनराशि खर्च की।

हालिया सूचना अधिकार 2005 के जरिये काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा मांगी गई सूचना के अनुसार राज्य के अधिकतर विधायकों ने अपनी विधायक निधि का पहले चार साल औसतन 80 प्रतिशत तक ही खर्च किया है । चुनावी साल में यह आंकड़ा थोड़ा बढ़ा लेकिन साल के अंत यानी 31 दिसम्बर 2021 तक विधायकों ने कितना खर्च किया आइये देखते हैं ।

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गत वर्ष निधि खर्च के मामले में नैनीताल से विधायक संजीव आर्य पहले नम्बर पर हैं उन्होंने कुल धनराशि का 90 प्रतिशत खर्च किया जबकि प्रेम चंद्र अग्रवाल,यशपाल आर्य,सुरेंद्र/ महेश जीना,राजकुमार ठुकराल,केदार सिंह रावत,खजान दास, हरबंश कपूर,गोविंद सिंह कुंजवाल,त्रिवेंद्र सिंह रावत,राजकुमार, विजय सिंह पंवार, सतपाल महाराज,और सुबोध उनियाल ने लगभग 70 से 75 प्रतिशत खर्च किया । जिन विधायकों ने 70 प्रतिशत से कम खर्च किया उनके नाम इस प्रकार हैं ।

सूचना के अनुसार 60 प्रतिशत विधायक निधि खर्च वाले विधायक धन सिंह हैं। 61 से 65 प्रतिशत खर्च वालेे विधायकों में महेश नेगी, सुरेंद्र सिंह नेगी, सहदेव पुंडीर का नाम शामिल है।

अब बात करते हैं उन विधायकों की जिन्होंने पांच साल में कुल 76 से 80 प्रतिशत तक राशि खर्च की । इनमें राजेश शुक्ला, हरीश धामी,हरभजन सिंह चीमा,हरक सिंह ,उमेश शर्मा काऊ, दीवान सिंह बिष्ट,पूरन सिंह फरतियाल,भारत सिंह चौधरी,अरविंद पांडे,रेखा आर्य,इंदिरा ह्रदयेश,आदेश चौहान,चंदन राम दास,कैलाश गहतोड़ी,रघुराम चौहान,शक्ति लाल,चंद्रा पंत,सुरेश राठौर, देशराज कर्णवाल,बलवंत सिंह और ऋतु खंडूरी शामिल हैं ।
राज्य में सर्वाधिक यानी 81 से 85 प्रतिशत खर्च करने वाले 14 विधायकों के नाम भी जान लीजिये । इनमें प्रदीप बत्रा,विनोद कंडारी,सौरभ बहुगुणा,संजय गुप्ता, काजी निजामुद्दीन, प्रीतम सिंह पंवार,जीआईजी मेनन,मीना गंगोला,मुकेश कोली, बिशन सिंह चुफाल,प्रेम सिंह राणा,स्वामी यतीश्वरानंद, दिलीप सिंह रावत और गणेश जोशी शामिल हैं ।
अब जानिए 8 विधायकों के नाम जिन्होंने 86 से 90 प्रतिशत विधायक निधि जनहित के कार्यों में खर्च किया इनमें कुँवर प्रणव चेम्पियन,,बंशीधर भगत,धन सिंह नेगी,नवीन दुमका, राम सिंह कैड़ा ,गोपाल सिंह रावत और संजीव आर्य शामिल हैं ।

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ज्ञात रहे कि खर्च की गई राशि की जानकारी चुनाव से पूर्व सार्वजनिक किए जाने का हालांकि कोई  कानून नही है। लेकिन यह मांग सोशल मीडिया में उठने लगी है कि विधायकों को अपनी निधि के खर्च का व्योरा चुनाव से पूर्व घोषित करना चाहिए ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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