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जैसे जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है उत्तराखंड में सारी राजनीतिक सरगर्मी पार्टी छोड़ने और दूसरे दल में शामिल होने तक सीमित हो गई है । प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में से लगभग 30 सीटें ऐसी हैं जिनपर भाजपा कांग्रेस में बगावती तेवर देखे जा रहे हैं । प्रदेश में जिस तरह दलों में बागी तेवर दिखाई दे रहे हैं उससे साफ है कि चुनावी गणित बड़े स्तर पर प्रभावित हो सकता है । भाजपा और कांग्रेस भीतरघात से जूझने की सोचे इससे पहले चुनाव का समय सन्निकट आता जा रहा है । ऐसे में अगर अप्रत्याशित चुनाव परिणाम आएं तो कोई बड़ी बात नहीं इसका बड़ा कारण है कि बागियों की राजनीतिक पृष्टभूमि मजबूत है ।

चुनाव पूर्व ही इस बार भी प्रदेश के कई नेता पाले बदल चुके हैं । चुनाव पूर्व भाजपा से कांग्रेस में और कांग्रेस से भाजपा में जाने की अब लिस्ट काफी बड़ी हो गई है । बड़े नेताओं में यशपाल आर्य उनके पुत्र संजीव आर्य टिहरी के विधायक धनसिंह नेगी सहित ओमगोपाल रावत हरक सिंह रावत कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं । वही कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय महिला कांग्रेस की अध्यक्षा सरिता आर्य भाजपा का कमल थाम चुके हैं ।

टिकट बंटवारे को लेकर दोनों दल असंतोष का सामना कर रहे हैं । करीब तीस विधानसभा सीटों पर कई दावेदार पार्टी उम्मीदवार के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं । जिन विधानसभा सीटों पर असंतोष है वह इस प्रकार है ।

भाजपा जिन विधानसभा क्षेत्रों में भीतरघात का शिकार हो सकती है उनमें यमुनोत्री, गंगोत्री, थराली, कर्णप्रयाग, घनसाली, नरेंद्रनगर, प्रतापनगर, धनोल्टी, पौड़ी, धारचूला, कपकोट, द्वारहाट, अल्मोड़ा, जागेश्वर भीमताल, नैनीताल, धर्मपुर, रायपुर, राजपुर रोड, देहरादून, ऋषिकेश, ज्वालापुर, रुड़की, मंगलौर, लक्सर, यमकेश्वर, काशीपुर, किच्छा ,रुद्रपुर शामिल है ।

कांग्रेस के लिए कई कॉमन सीटें दिक्कत वाली साबित हो सकती हैं जिन सीटों पर बागी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं उनमें यमुनोत्री, गंगोत्री, रुद्रप्रयाग, घनसाली, सहसपुर, रायपुर, बीएचईएल रानीपुर, यमकेश्वर, गंगोलीहाट, बागेश्वर, हल्द्वानी, काशीपुर, बाजपुर, सितारगंज, देहरादून कैंट, ऋषिकेश, ज्वालापुर, झबरेड़ा, खानपुर, लैंसडौन,टिहरी और हरिद्वार ग्रामीण शामिल है । कांग्रेस के लिए 23 विधानसभा सीट जबकि भाजपा के लिए 28 सीटों पर बागी मुसीबत बने हुए हैं ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क की रिपोर्ट

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