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आज आप जानेंगे बद्रीनाथ धाम से तक़रीबन 4 किलोमीटर की दुरी पर भारत तिब्बत सीमा पर स्थित माणा गांव के बारे में…
viewers इसी चैनल में हम इसे पहले बद्रीनाथ धाम aur mana gaon की विस्तृत जानकारी देता वीडियो आपके लिए ला चुकें हैं jiska link aapko screen kee uppari hisse aur neeche discription mei bhi mil jaayega,
नमस्कार viewers, popcornTrip में आपका स्वागत हैं, इस वीडियो में जानेगे-
mana gaon, vyas gufa, bhim pul, vasu dhara aadi ke baare mein
बद्री धाम के कपट खुलने का समय/ कब आयें –
हिमालय में बद्रीनाथ से तीन किमी आगे समुद्रतल से 3111 मीटर की उचाई पर बसा गुप्त गंगा और अलकनंदा के संगम पर भारत-तिब्बत सीमा से लगे है भारत का अंतिम गाँव माणा।
बद्रीनाथ आने वाले श्रद्धालु माणा गाँव भी जरूर आते हैं, सड़क से लगभग आधा किलोमीटर पैदल चल कर यहाँ पंहुचा जा सकता हैं,
भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित इस गाँव के आसपास कई दर्शनीय स्थल हैं जिनमें व्यास गुफा, गणेश गुफा, सरस्वती मन्दिर, भीम पुल, वसुधारा आदि मुख्य हैं।
माणा में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। यह एक छोटा सा गांव है जहां के लोग मई से लेकर अक्तूबर तक इस गांव में रहते हैं, क्योंकि बाकी समय यह गांव बर्फ से ढका होता है। सर्दियां शुरु होने से पहले यहां रहने वाले ग्रामीण नीचे स्थित चमोली जिले के गाँवों में shift ho jaate हैं।
इस गांव में एक ऊंची पहाड़ी पर बहुत ही सुन्दर गुफा है, ऐसी मान्यता है कि व्यास जी इसी गुफा में रहते थे। व्यास गुफा के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर वेदव्यास ने पुराणों की रचना की थी वर्तमान में इस गुफा में व्यास जी का मंदिर बना हुआ है।
व्यास गुफा को बाहर से देखकर ऐसा लगता है मानो कई ग्रंथ एक दूसरे के ऊपर रखे हुए हैं। इसलिए इसे व्यास पोथी भी कहते हैं।
व्यास गुफा के पास एक बोर्ड लगा है. ‘भारत की आखिरी चाय की दुकान’ जी हां, इसे देखकर हर सैलानी और तीर्थयात्री इस दुकान में चाय पीने के लिए जरूर रुकता है.
यहां से लगभग सौ दो सौ मीटर नीचे की और उतरने पर स्थित है भीमपुल
कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्ग को जा रहे थे तो उन्होंने इस स्थान पर सरस्वती नदी से जाने के लिए रास्ता मांगा, लेकिन सरस्वती ने उनकी बात को अनसुना कर दिया और मार्ग नहीं दिया. ऐसे में महाबली भीम ने दो बड़ी शिलाएं उठाकर इसके ऊपर रख दीं, जिससे इस पुल का निर्माण हुआ. पांडव तो आगे चले गए और आज तक यह पुल मौजूद है.
यह भी एक रोचक बात है कि सरस्वती नदी यहीं पर दिखती है, इससे कुछ दूरी पर यह नदी अलकनंदा में समाहित हो जाती है. नदी यहां से नीचे जाती तो दिखती है, लेकिन नदी का संगम कहीं नहीं दिखता. इस बारे में भी कई मिथक हैं, जिनमें से एक यह है कि महाबली भीम ने नाराज होकर गदा से भूमि पर प्रहार किया, जिससे यह नदी पाताल लोक चली गई.
दूसरा मिथक यह है कि जब गणेश जी वेदों की रचना कर रहे थे, तो सरस्वती नदी अपने पूरे वेग से बह रही थी और बहुत शोर कर रही थी. आज भी भीम पुल के पास यह नदी बहुत ज्यादा शोर करती है. गणेश जी ने सरस्वती जी से कहा कि शोर कम करें, मेरे कार्य में व्यवधान पड़ रहा है, लेकिन सरस्वती जी नहीं मानीं. इस बात से नाराज होकर गणेश जी ने इन्हें श्राप दिया कि आज के बाद इससे आगे तुम किसी को नहीं दिखोगी.
वसुधारा- माणा से लगभग 5 किमी की दूरी पर बसुधारा प्रपात है यहां पर जलधारा 500 फीट की ऊंचाई से
गिरती है। ऐसा कहा जाता है कि जिसके ऊपर इसकी बूंदें पड़ जायें उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

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