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उत्तराखंड सरकार ने उपनल कर्मियों को दो से तीन हजार रुपये बढ़ोतरी की घोषणा की थी । संविदा कर्मचारियों ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है ।

राज्य में लंबे समय से संविदा कर्मी  आंदोलन कर रहे हैं  कर्मचारी सरकार से नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश  के पालन की मांग पर अड़े हैं  सरकार की मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा से  उपनल कर्मी  खुश नहीं हैं । राज्य के कनिष्ठ अभियंताओं ने  मुख्यमंत्री से आश्वाशन के बाद भी कोई सकारात्मक परिणाम न मिलने पर नाराजी व्यक्त की है । हालांकि इधर आज आशा हेल्थ वर्कर्स ने जनहित में हड़ताल वापसी की बात कही है । साथ ही उचित मानदेय की लड़ाई जारी रखने को कहा है ।

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उपनल कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष ने बयान में  कहा है कि उनकी मांग समान काम के लिए समान वेतन की है लिहाजा सरकार की घोषणा से संगठन कोई इत्तफाक नहीं रखता है । उन्होंने यहां तक कहा कि यह चुनावी साल में झुनझुना मात्र है ।

संगठन ने सरकार से हाईकार्ट के आदेशों का पालन करने की मांग की है । प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा है कि कोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन और एक वर्ष के भीतर नियमावली बनाने का आदेश दिया था साथ ही स्थायी नियुक्ति देने की बात की थी । भट्ट ने कहा कि सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट चली गई । कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की नीयत कर्मचारियों के पक्ष में नहीं है चुनावी साल में वह 3000 रुपये देने का झुनझुना दिखा रही है । प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा भी सरकारी फरमान की मुखालफत करते हुए कहते हैं कि पूरी मांग माने जाने तक संगठन आंदोलन जारी रखेगा ।

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इधर राज्य के 304 संविदा कनिष्ठ अभियंताओं ने भी सरकार द्वारा तीन हजार रुपए बढ़ाये जाने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है । कनिष्ठ अभियंता संविदा उत्तराखंड समिति के कुमाऊँ मंडलीय अध्यक्ष संदीप तिवारी ने कहा है कि राज्य के विकास कार्यों में निरंतर भागीदारी कर रहे संविदा कनिष्ठ अभियंताओं को विगत 10 माह से देय मानदेय तक नही मिला है । तिवारी ने कहा है कि विगत माह संगठन ने मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी पेरशानियों से अवगत कराने के वावजूद उनकी तय सैलरी न आने से कनिष्ठ अभियंताओं के परिवार संकट में हैं । मंडल अध्यक्ष ने कहा है कि उनके पास भी भविष्य में हड़ताल में जाने के शिवा कोई चारा नहीं है । उन्होंने आरोप लगाया कि लोकनिर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने भी आश्वाशन के वावजूद उनकी मांगों की अनदेखी की है । उन्होंने मांगे नहीं माने जाने पर जल्द आंदोलन धरना जैसे कदम उठाने की बात कही है ।

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हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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