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बड़ी खबर : उत्तराखंड में शिक्षक तबादलों के बाद एक विवादित अफसर की बैक डेट नियुक्त का मामला सामने आया, चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान, विस्तृत खबर @हिलवार्ता

उत्तराखंड में विवादित अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर बवाल जारी है । एक सप्ताह पहले हरिद्वार में भारी संख्या में शिक्षकों के तबादलों की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि आज वीर माधो सिंह भंडारी विश्वविद्यालय में नियुक्त हुए प्रो. कुँवर सिंह वैसला का मामला तूल पकड़ने लगा है । यह मामला सुनसान निपट जाता लेकिन आगरा निवासी सुधीर कुमार के चुनाव आयोग को लिखे एक पत्र से मामला खुल गया ।

खबर विस्तार से . उत्तराखंड में PCS अफसरों को चाहे डीपीसी करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक जाना पड़े लेकिन किसी न किसी आरोप में धरे गए आरोपितों को यहां मनचाही तैनाती और पदोन्नति मिलना सबसे आसान है ।
उत्तराखंड में किसी भी सरकार में उक्त विवादित अधिकारी हर बार अपनी गोटी फिट करने में सफल होते हैं । इसकी बानगी टेक्निकल यूनिवर्सिटी  के पूर्व कुलपति से लेकर पूर्व रजिस्ट्रार के मामले में देखी जा सकती है । जिनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता सहित महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले चले कोर्ट से सजा हुई लेकिन सरकार की मोहब्बत से बेदखल नही हए । मृत्युंजय मिश्रा जमानती होकर आयुर्वेद विश्वविद्यालय में फिर रजिस्ट्रार बना दिए गए । ऐसा ही एक मामला आज सामने आया है माधो सिंह भंडारी विश्वविद्यालय में सरकार ने जाते जाते एक और कारनामा किया है ।

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ज्ञात हुआ है कि द्वाराहाट इंजिनीयरिंग कालेज में प्रो. कुँवर सिंह वैसला को सरकार जाते जाते माधो सिंह विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार बना गई । जब कि ज्ञात हुआ है कि उक्त महानुभाव पर महिला यौन उत्पीड़न के केस की जांच चल रही है । सूत्रों के अनुसार प्रो वैसला की नियुक्ति ही कुमायूँ औद्योगिक संस्थान में महिला कोटे ते तहत हुई है यह भी एक जांच का विषय है  ।

सारा मामला संज्ञान में आने के बाद आज राज्य के सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने सचिव तकनीकी शिक्षा को पत्र लिख मामले की जांच आयोग को भेजने को कहा है ।

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पत्र में सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सुधीर कुमार 128 पांडव नगर शाहगंज आगरा के 11 जनवरी 2022 को आधार मानते हुए सचिव को कहा है कि सचिव तकनीकी शिक्षा द्वारा उत्तराखंड विधान सभा चुनाव 2022 में आचार संहिता का उल्लंघन कर बैक डेट से भ्र्ष्टाचार में लिप्त अधिकारी प्रो. कुँवर सिंह वैसला की वि.त्रि कुमायूँ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से माधो सिंह विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार के पद पर दिनांक 7/1/2022 के पत्रांक द्वारा नियुक्ति किए जाने का उल्लेख किया है । अतः उक्त सम्बन्ध में यह कहने का आदेश हुआ है कि भारत निर्वाचन आयोग की आचार संहिता में दिए गए तदविषयक निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्यवाही किए जाने हेतु सम्बंधित को निर्देशित करने के कष्ट करें ।

कांग्रेस विधायक मनोज रावत ने आज अपने फेसबुक पेज पर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त मृत्युंजय मिश्रा के कारनामों को उजागर किया है । रावत ने मुख्य सचिव को पत्र लिख मामले की जांच की मांग की है । रावत ने लिखा है कि कोर्ट में विचाराधीन उक्त अधिकारी की नियुक्ति में आखिर सरकार को ऐसी क्या मजबूरी रही कि उसे अविलम्ब पद पर बिठा दिया गया ।

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आज मामला संज्ञान में आने के बाद अलमोड़ा से राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने भी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि शिक्षकों और विवादित अधिकारियों की बैक डोर इंट्री के मायने क्या हैं । क्या यह सरकार के संज्ञान के बिना संभव है । टम्टा ने कहा है कि वह जल्द चुनाव आयोग से सरकार द्वारा आचार संहिता लागू होने के बाद जितने भी लोगों को बैक डेट में नियुक्त दी है की जांच कराने की मांग करेंगे ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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